Thursday, July 22, 2010

होटल और रेस्टोरेट क्षेत्रों में दो व्यापारोन्मुख पाठ्यक्रम

होटल प्रबंधन और खान-पान कला तकनीक राष्ट्रीय परिषद (एनसीएचएमसीटी) और केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के बीच आतिथ्य सत्कार क्षेत्र के लिए कुशल श्रम शक्ति उपलब्ध कराने की जरूरत को समझते हुए खाद्य उत्पादन और खाद्य तथा पेय सेवा के क्षेत्र में व्यावसायकि विधा के तहत दो व्यापारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर अवसर पर पर्यटन मंत्री ने कहा है कि वर्ष 2007-08 में देश के सकल घरेलू उत्पादन में पर्यटन का सहयोग 5.92 प्रतिशत और रोजगार में 9.24 प्रतिशत था। कुमारी सैलजा उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था का पर्यटन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ पर्यटन अर्थव्यवस्था की वृद्धि का एक महत्वपूर्ण अंग भी है खासतौर पर रोजगार सृजन केमामले में। उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था से उत्पन्न अवसरों के लाभ के लिए पर्यटन उद्योग को तत्पर रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक सर्वेक्षण के अनुसार उद्योग को प्रतिवर्ष दो लाख प्रशिक्षित कार्मिकों की आवश्यकता है जबकि इसके विपरीत मात्र 18000 व्यक्तियों की ही उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि एनसीएचएमसीटी और सीबीएसई के बीच हुआ समझौता इस संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। यह उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2022 तक इस क्षेत्र में विशेष पर्यटन दक्षता से जुड़े करीब 50 लाख शिक्षित व्यक्ति उपलब्ध होंगे। होटल और रेस्टोरेट क्षेत्रों में मुख्य संचालनात्मक क्षेत्रों को भरने के लिए कुशल व्यक्तियों की उपलब्धता में रिक्तता को कम करने में मदद मिलेगी। इन लोगों को उद्योग में प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा ,उन्होंने माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रमों में इस संदर्भ में एक अध्याय जोड़ने संबंधी विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे देश के स्वरूप को नया आकार देने में महत्वपूर्ण मदद मिलेग ,यह समझौता पर एनसीएचएमसीटी के सीईओ श्री देवेश चतुर्वेदी और सीबीएसई के अध्यक्ष श्री विनीत जोशी ने हस्ताक्षर किए।

2 comments:

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

इन पाठृयक्रमों के प्रति छत्‍तीसगढ़ के विद्यार्थी उदासीन नजर आते हैं, आपने सही लिखा है कि प्रदेश में होटर व रेस्‍टारेंट उद्योग में प्रबंधन से लेकर वेटर तक के पदों की रिक्‍तता है। क्षेत्र में संचालित कुछ निजी संस्‍थान कार्यरत है किन्‍तु वे काफी नहीं हैं। प्रदेश के होटलों में 99.99 प्रतिशत प्रबंधकीय व रसोई कर्मचारी गैर छत्‍तीसगढि़ये हैं 80 प्रतिशत वेटर व इस स्‍तर के कर्मचारी महाराष्‍ट्र व साउथ के हैं।

मैं इस पाठ्यक्रम से आश्‍वस्‍त नहीं हूं फिर भी देखते हैं कैसे उम्‍मीदवार पासआउट होकर हमारे पास आते हैं।

श्याम कोरी 'उदय' said...

...प्रभावशाली पोस्ट!!!

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