Wednesday, December 21, 2011

'30 अंडर 30' सूची जारी

प्रख्यात अमेरिकी व्यापार पत्रिका फोर्ब्स प्रति वर्ष विश्व के नागरिको की सूचि जरी करती है जो अपने तरीके से अनूठी होती है भविष्य के प्रतिभावान युवायो की सूचि में १० भारतीयों का शामिल होना युवा भारत की पहचान है सभी को युवा सन्देश की और से बधाई

पत्रिका फोर्ब्स की 'भविष्य के प्रतिभावान युवाओं' की सूची में शामिल 10 भारतीयों को सोशल नेटवर्किं ग वेबसाइट फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकेरबर्ग और पॉप संगीत के सितारों लेडी गागा और जस्टिन बीबर के साथ एक मंच पर शिरकत करने का मौका मिलेगा। ।

फोर्ब्स ने यह सूची '30 अंडर 30' के नाम से जारी की। सूची में विश्व के 360 प्रतिभावान युवाओं को शामिल किया गया है जो भविष्य में दुनिया के लिए एक शख्सियत बनेंगे,सूची में ऊर्जा, वित्त, मीडिया, कानून, मनोरंजन, विज्ञान, निर्माण और प्रौद्योगिकी सहित 12 विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है। सूची में शामिल भारतीय कुनाल शाह (29) गोल्डमैन सैक्स के सबसे युवा प्रबंध निदेशक,भारतीय युवा 17 वर्षीय परम जग्गी , ऑस्टिन कॉलेज के प्रतिभावान छात्र हैं। जग्गी को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। इन्होंने शैवाल की मदद से एक उपकरण बनाया है। इस उपकरण को यदि कार की टेलपाइप पर लगा दिया जाए तो यह कार्बन डाईऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदल देता है।

23 वर्षीय विवेक नायर दमिश्क फाच्र्युन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। विवेक एक ऐसी प्रौद्योगिकी के विकास में लगे हैं जो औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन को कार्बन नैनोट्यूब्स में बदल सकती है। जबकि वित्त के क्षेत्र में विकास मोहिंद्रा (25)ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विकास अमेरिकी बैंक मेरिल लिंच में वित्तीय सलाहकार हैं। इन्होंने मात्र तीन साल में बैंक के लिए 3.8 करोड़ डॉलर जुटाए।

भारतीय युवा मनवीर निजार (28) यूरोपियन सिटीग्रुप में यूरोपियन इक्विटी डेरिवेटिव्स सेल्स के सह प्रमुख हैं। 29 वर्षीय राज कृष्णन बायोलॉजिकल डाइनामिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। वह रक्त जांच की एक ऐसी प्रणाली विकसित कर रहे हैं जिससे यह पता चल सकेगा मरीज को ब्लड कैंसर होने के संकेत हैं अथवा नहीं, सिद्धांत गुप्ता (27) बिजली की बचत के लिए सॉप्टवेयर विकसित कर रहे हैं , निखिल अरोरा (24), मनोरंजन के क्षेत्र में , सीएनबीसी में निर्माता मनीत आहुजा (27) को सूची में जगह दी गई है

ये भारतीय युवा आने वाले दिनों भारत की शान बनेंगे


Saturday, December 10, 2011

९० मिनट की जेल

कल छत्तीसगढ़ की ९० विधान सभा सीटो पर कांग्रेस ने जेल भरो आन्दोलन का आयोजन किया मांग थी किसानो को २७० रुपये बोनस दो ,में भी कांग्रेस की और से डोंडी लोहरा विधानसभा का सन्वयक बनाया गया था ,श्री नन्द कुमार पटेल जी ने यह जिम्मेदारी जिस उम्मीद से दी थी वह तो पूरी हो गयी ,पर जेल मिली सिर्फ ९० मिनटों की , वह भी अस्थायी जेल में .प्रशाशन ने एक स्कूल को अस्थायी जेल बनाया था ,
सुबह -सुबह उठ कर में अपने बच्चे के स्कूल जाने के समय उसके साथ ही तैयार हो गया बच्चे के सवाल पर मैंने बताया की जेल जा रहा हु ,उसे विश्वास ही नहीं हुआ
जब वह स्कूल से लोटा तो फिर जिज्ञासा वस् मोबाईल पर कॉल कर पूछा ,पापा क्या आप जेल पहुच गए ? मेने बताया की बेटा अभी भाषण चल रहा है १/२ घंटे बाद चले जायेंगे
डोंडी लोहरा में वहा के पूर्व विधायक डोमेन्द्र भेड़िया,रजा भूपेंद्र टेकाम ,मुक्ति गुहा नियोगी ,अनिला भेड़िया , प्रदेश सचिव डॉ शिव नारायण द्वेवेदी के नेत्रित्व में डोंडी ,दल्ली .और लोहरा के ब्लोक कांग्रेस अध्याच्चो के साथ लगभग १३००-१४०० लोग रेली निकाल कर तहशील कार्यालय जा रहे थे बीच रस्ते में पोलिस ने स्कूल के सामने रेली को रोक कर गिरफ्तार कर लिया
गिरिफ्तारी के बाद नाम दर्ज करने की प्रक्रिया चली और इसमे जो ९० मिनट का समय लगा वो था हमारा जेल में रहने का समय ...........

Tuesday, March 15, 2011

युवा पीढ़ी सबक ले-होली प्रेम भाव को बढ़ाने वाला

प्राचीन समय में होली प्रेम भाव को बढ़ाने वाला त्यौहार था ।हमारे दोस्तों ,गावो ,परिवार में यदि वर्ष भर में आपस में कोई-झगड़े या मनमुटाव की बात हो जाती तो इस दिन उसे भुलाकर सब लोग प्रेम से गले मिल लेते थे और पुरानी गलतियों के लिए एक-दूसरे को क्षमा करके फिर से मित्र सहयोगी बन जाते थे वर्तमान समय में अब भी इस दिन एक-दूसरे के यहाँ मिलने को जाते हैं, पर प्रायः नशा करके गाली बककर झगड़ा पैदा कर लेते हैं, जो होली के उद्देश्य के सर्वथा प्रतिकूल है । वास्तव में होली का त्यौहार हमारे समाज में सबसे अधिक सामूहिकता का परिचायक है और यदि इसे समझदारी के साथ मनाया जाय तो यह हमारे लिये अत्यन्त कल्याणकारी सिद्ध हो सकता है । जिस प्रकार होली के पौराणिक उपाख्यान में बतलया गया है कि सच्चे भक्त प्रहलाद् ने असत्य और अन्याय का प्रतिरोध करके सत्य की रक्षा की थी और उसी की स्मृति में होली के त्यौहार की स्थापना की गई थी, उसी प्रकार हम भी यदि इस वास्तविक उद्देश्य का ध्यान रखकर होली का त्यौहार मनायें तो इस अवसर पर वर्तमान समय में होने वाली अनेक हानियों से बचकर इस त्यौहार को लोक कल्याण का एक प्रमुख साधन बना सकते हैं आयो हम सब मिल कर पुनः अपनी पुराणी परम्परयो को पुनर्जीवित करने की दिशा में जागरूकता अभियान चलाये ताकि आने वाली युवा पीढ़ी सबक ले कर सही राह पर आये

Friday, November 12, 2010

हमारे लोकतंत्र की पहचान-परंपरा

भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के मामले में पाकिस्तान को भारत से सीख लेनी चाहिए। ये विचार एक पाकिस्तानी दैनिक ने अपने सम्पादकीय में व्यक्त किए हैं।
अखबार ने कहा की भारत ने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे कांग्रेस के दो नेताओं को इस्तीफा देने का निर्देश देकर अपने नेताओं को जिम्मेदार बताया है। पाकिस्तान की सरकार को भी भ्रस्टाचार सहित नेतिकता के मामलों में एसा ही करना चाहिए।
भारत में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से इस्तीफा मांग कर देश के सामने पुनः एक मिशाल कायम की है सुरेश कलमाडी को खेलों के उनके प्रबंधन के कारण भारत की शर्मसार स्तिथीबनी थी और भ्रस्ताचार के गंभीर आरोपों से घिर गए थे ,
अशोक चव्हाण ने कारगिल युद्ध के शहीदों की विधवाओं के लिए बनी आवासीय इमारत में हुए घोटाले में उनका नाम कथित तौर पर आया ।दोनों मामलों की अभी प्रारंभिक जाच चालू हुयी है उनके दोष अभी साबित नहीं हो पाए हैं, लेकिन नेताओं ने अपने पद की गरिमा बरकरार रखने के लिए इस्तीफा दे दिया है। ये एक नयी मिशाल है वेसे सूचना के अधिकार ,पंचायती राज प्रणाली जे कदम पर कांग्रेस की सार्थक सोच का लाभ भी भारतीय राजनेतिक परम्परयो को बनाने में रहा है यह अर्जुन सिंह ,विद्याचरण शुक्ल ,प्रणब मुखर्जी ,चन्द्र शेखर ,कई रेल मंत्री ,रक्चा मंत्री ,राशन घोटालो में नेतिकता का तकाजा सामने रखा गया था ,
इसी परंपरा नुसार ताजा कार्रवाई, पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक नया कदम है और यही हमारे लोकतंत्र की पहचान है।

Monday, October 4, 2010

कार्यकर्तायो को अपना चमचा बनाने के चलते कांग्रेस का यह परिणाम

भटगांव उपचुनाव के नतीजे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के अपने-अपने दावे थे । इस सीट से श्रीमती रजनी त्रिपाठी ने 35 हजार से भी ज्यादा वोटों से चुनाव जीत लिया यह चुनाव से प्रत्याशी की लोकप्रियता, पार्टी के कार्यों की गणना या अन्य किसी भी तरह के कारणों से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। फिर भी, चुनाव के दौरान प्रचार, नेताओं के दौरे, भाषण और मुद्दों के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भाजपा का पलड़ा भारी था इसलिए इस दफा बाजी उसके हाथों में होगी।अब अगर चुनाव के दौरान के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो एक बार फिर भाजपा सांसद दिलीप सिंह जूदेव भारी पडे। श्री जूदेव ने भावनात्मक रूप से मतदाताओं से अपील की कि विरोधी पक्ष के उम्मीदवार उनके चचेरे भाई हैं लेकिन वे इस युद्ध में सत्य के साथ हैं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं के बलबूते प्रचार किया तो चुनाव मैनेंजमेंट में माहिर बृजमोहन अग्रवाल के हाथों संचालन की कमान रही है। तेजतर्रार आदिवासी मंत्री रामविचार नेताम,सांसद मुरारी लाल सिंह की मेहनत रंग लायी सबसे बड़ी बात एक बार फिर बीजेपी ने राजमहल के खिलाफ आम जनता के प्रतिनिधित्व का मुद्दा मतदाताओं के समक्ष रखा ।
दूसरी ओर कांग्रेस ने भी सभी विधायकों को मैदान में उतारकर वैशाली नगर की रणनीति अपनाई। लेकिन उसके स्टार प्रचारक पूर्व मुख्यमंत्री के भाषण को दूसरे नजरिए से देखा गया। श्री जोगी ने ताल ठोंकी है कि चुनाव जीतने के बाद भाजपा सरकार को २०१० में ही उखाढ़ फेकेंगे । इस पर कांग्रेस में ही सवाल उठे ,लोकतंात्रिक व्यवस्था के खिलाफ आचरण के कारण श्री जोगी पूर्व में भी आलोचना के शिकार हो चुके हैं और पार्टी से निलंबित भी ।
एन सब बातो का राजनेतिक अध्ययन करने वाले जानकर वरिष्ट पत्रकार श्री प्रकाश होता ने आज एक स्थानीय टी. वी. चेनल में कहा की यह कांग्रेस के बढे नेतायो की हार है , कांग्रेस ने कार्यकर्तायो की पूछने वाला कोई नहीं पुरे चुनाव में पैसे की कमी का रोना रहा उन्होंने बढे नेतायो और कर्कार्तायो के रिश्ते में दूरी को भी बताया , कुल मिला कर कहा जाये हो यह चुनाव में नेतायो ने कार्यकर्तायोसे कई रायशुमारी नहीं की और लम्बे समय से नेता कार्यकर्तायो से दूर होते जा रहे है अभी -अभी निपटे राज्य सभा के चुनाव में ये नेता दो दिनों तक डेरा डाले थे ,जबकि यहा विधायक ही वोटर थे और हार की कोई सम्भावना ही नहीं थी ,इसी के उलटे हाई कमान यह पता कर ले इन्ही नेतायो ने नगर निगम , जिला पंचायत ,सहकारिता के चुनाव में क्या किया गया , पेसो की तो बात दूर, कार्यकर्तायो से कार्यकर्तायो को लड़ाने में कोई कसार नहीं छोड़ी और शायद ये छोटा चुनाव किसी भी पार्टी की नीव है, यही सब अपना तगमा लगाने के लिए नियम कायदों अनुभव निष्ठा को दर किनार रख संघठन चुनाव में हुआ कार्यकर्तायो के को अपना चमचा बनाने ही होड़ के चलते कांग्रेस का यह परिणाम आया है और यदि हाई कमान सीधे सामने नहीं आया तो कांग्रेस का गढ़ कार्यकर्तायो की हताशा से भाजपा का गढ़ बन ही जायेगा

Monday, August 30, 2010

जनता की भावना के अनुकूल निर्णय,ब्लैकबेरी देगा डाटा

ब्लैकबेरी फोन बनाने वाली कंपनी रिसर्च इन मोशन (रिम) भारत सरकार को सभी डाटा उपलब्ध कराने को लेकर राजी हो गई अब ब्लैकबेरी विवाद समाप्त हो रहा है। अब रिम कानून के तहत खुफिया एजेंसियों को काल्स, मैसेज की जांच करने देगा अब ब्लैकबेरी सेवाओं से किसी भी व्यक्ति के फोन और संदेश टैप करने में आसानी होगी और आतंकवादियों द्वारा इन सेवाओं का इस्तेमाल करने की स्थिति में उनकी साजिश का पर्दाफाश भी किया जा सकेगा। इस कार्य के लिए ब्लैकबेरी भारत में अपना सर्वर स्थापित करेगा सूत्रों के अनुसार रिम को दो महीने की मोहलत दी गई है।
भारत सरकार ने ब्लैकबेरी को सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया था। अन्यथा उसकी कुछ सेवाओं को प्रतिबंधित किया जा सकता था।समयसीमा के एक पहले रिम ने अपनी सभी सेवाओं पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के तत्काल प्रभाव से एक्सेस का वायदा कर दिया। भारत सरकार की यह एक उपलब्धि कही जा सकती है सारे दबावों के बाद भी भारत ने यहाँ की जनता की भावना के अनुकूल निर्णय ले कर जनता का सर उंचा किया है
यह कहा गया है की रिम सुरक्षा एजेंसियों को पूर्ण डाटा एक्सेस प्रदान करेगी। ब्लैकबेरी सेवाओं से सुरक्षा मसलों की समीक्षा 60 दिन में की जाएगी और इस बीच दूरसंचार विभाग (डीओटी) भारत में स्थापित सर्वर के जरिए ऐसी सेवाएं मुहैया कराने की व्यवहार्यता का अध्ययन करेगा कंपनी ने मैनुअल एक्सेस का प्रस्ताव भी रखा था, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने यह कहकर नकार दिया था कि वह किसी व्यक्ति का फोन टैप करने से जुडी जानकारी कंपनी या किसी अन्य पक्ष के साथ नहीं बांट सकती। अभी भारत में 900 से अधिक निगमित घराने और कंपनियां तथा लगभग दस लाख लोग ब्लैकबेरी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।

बिहार में जाति-विकास में होड़

लालू को पिछडो का कांग्रेस, नितीश ब्राहमण को साथ लेने की ओर
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बिहार में ऊंची जाति के किसी नेता का मुख्यमंत्री बनना मुश्किल दिख रहा है। वो सवर्णो को अपनी ओर लुभाने की कोशिशें में १०%आरक्षण देने की घोषणा कर दी हैं।एक पत्र वार्ता में लालू ने शान से कहा की ‘यह मेरी देन है कि बिहार में सवर्णो को मुख्यमंत्री बनाने की अब कोई हिम्मत नहीं करता।’
लोकसभा चुनावों में हार के बाद सवर्ण वोट बैंक एवम पिछड़े व दलित वोट बेंको पर नजर गड़ाए लालू ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो के लिए सरकारी नौकरियों में दस फीसदी आरक्षण का चारा भी फेंक दिया। स्वयं को यादव मुस्लीम पिछडो का नेता मानने वाले लालू दलित नेता रामविलास पासवान के कंधे पर सवार हो कर बिहार विधान सभा की गद्दी हतियाना चाहते है ,नीतीश कुमार सरकार पर सिर से पैर तक भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए लालू अपने शासन कल के चारा घोटाले सहित विभिन्न भ्रटाचार को भूल रहे है राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और लोजपा के पासवान आपस में मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री ,पद राजद-लोजपा गठबंधन में आपस में बाट ली है ,पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस को उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है दोनों दल लोकसभा में हार का मुह देख चुके है जातीवादी राजनीती पर विकास की लडाई चल रही है कांग्रेस अपने बल बूते चुनाव में उतरने की तैयारी में है राहुल गाँधी ने पिछले दिनों बिहार दौर में नितीश कुमार की तारीफ कर एक नया समीकरण की और इशारा कर भाजपा को दुविधा में दल दिया था
बिहार की राजनीती के जानकार और इतिहास बिहार की राजनीती को उतरप्रदेश की तरह बिना ब्राहमणों के बिना अधुरा मानते है यहाँ के मतदान की चर्चा पुरे देश की जाती रही है बूथों की लूट एक आम विषय रहता था ,अशांति और विकास एक दुसरे विपरीत ध्रुव है, बिना शांति भाई चारे सद्भावना के विकास संभव नहीं होता है , आने वाला चुनाव लालू पासवान की जोड़ी को ओर जोर से झटका दे वाला होगा , अगर काग्रेस मजबूती से सभी को जोड़ पाए तो ,उ. प. ,बिहार में कांग्रेस की वापसी होती नजर आ रही है

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