Monday, May 24, 2010

राहुल खुशकिस्मत है मममोहन कुर्सी छोड़ने तैयार है

आज मनमोहन के नेत्रित्व में चल रही सरकार के एक वरस पूर्ण होने पर आयोजत रास्ट्रीय पत्रकार वार्ता में राहुल गांधी के राजतिलक पर उन्होंने कहा कि इस कुर्सी पर वे सिर्फ़ उस वक़्त तक बैठे हैं जब तक राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार नहीं हो जाते. उन्होंने कहा कि "मुझे कभी कभी लगता है कि नौजवानों को ये ज़िम्मेदारी संभालनी चाहिए. जब भी पार्टी ये फ़ैसला करेगी मैं ख़ुशी से कुर्सी छोड़ दूँगा." उन्होंने एक सवाल पर कहा, मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे सोनिया गांधी और मेरी पत्नी गुरशरण कौर से लगातार सलाह मिलती रहती है. दोनों का विषय अलग-अलग होता है. और मैं दोनों की सलाह की क़द्र करता हूं.
राहुल गाँधी के लिए ये बात खुशकिस्मत की है की लगातार कांग्रेस की परम्परा पर मनमोहन कायम है वे हालाकि देश आर्थिक मामलो के विशेषज्ञ है लेकिन पुरे विश्व के साथ भारत भी न केवल आर्थिक मंदी के दोर से गुजर रहा है और साथ ही तेजी से बढती कीमते आम उपभोग्तायो को लगातार परेशान किये है पूरा प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बेठा नजर आता है पूरी कांफ्रेंस में मनमोहन सिंह संचिप्त जबाब देकर ओप्चारिक्ताये करते नज़र आये काग्रेस की राजनीती में इन दिनों भविष्य में सत्ता की मलाई खाने की गलाकाट स्पर्धाहोने को है कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग जहां अब सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ ले जाना चाह रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के कुछ प्रबंधक चाह रहे हैं, अगले आमचुनाव के बाद ही राहुल सत्तासीन हो वाही इस कड़ी में 2012 को बहुत ही अहम माना जा रहा है। 10 जनपथ के सूत्रों का कहना है कि 2014 में संपन्न होने वाले आम चुनावों में वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को पार्टी का नेतृत्व नहीं करने देने के मसले पर सोनिया गांधी ने अपनी मुहर लगा दी है। सोनिया के इस तरह के संकेत के साथ देश के महामहिम राष्ट्रपति का चुनाव होना है। कांग्रेस के प्रबंधकों का एक धड़ा इस प्रयास में लगा हुआ है कि डॉ. मनमोहन सिंह को
राष्ट्रपति बना दिया जाए, इस स्थिति में कांग्रेस को फिर एक भगवान राम के स्थान पर जिस तरह भरत ने खड़ांउं रखकर राज किया था, उसी तरह खड़ांउं प्रधानमंत्री की दरकार होगी। 2012 में 7, रेसकोर्स रोड (भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) को आशियाना बनाने की इच्छाएं अब कांग्रेस के अनेक नेताओं के मन मस्तिष्क में कुलाचें भरने लगी हैं। इस दौड़ में प्रणव मुखर्जी , सुशील कुमार शिंदे दिग्विजय सिंह के नाम सामने आ रहे हैं।
दिग्विजय सिंह इक्कीसवीं सदी में कांग्रेस के अघोषित चाणक्य हैं। सामंतवाद और राजपूत दोनों वर्ग का प्रतिनिधितव करते है , मध्य प्रदेश में दस साल तक राज करने वाले राजा दिग्विजय सिंह ने संयुक्त मध्य प्रदेश में तत्कालीन क्षत्रप विद्याचरण शुक्ल, श्यामा चरण शुक्ल, माधव राव सिंधिया, कुंवर अर्जुन सिंह और कमल नाथ, अजीत जोगी,सुभास यादव जैसे नेताओं को लगभक राजनीती का एहसास करा दिया था वह बात कांग्रेस के नेतायो की स्मृति से विस्मृत नहीं हुई है। वाही निष्ठा और वोटो की राजनीती अनुसूचित वर्ग के सुशील कुमार शिंदे और ब्रह्मण वर्ग के प्रणव मुखर्जी को भी इस पद का दावेदार बनती है

2 comments:

pankaj mishra said...

अजय जी, मनमोहन जी की बात अपनी जगह ठीक है। पर एक सवाल यह भी है कि उनके पास इसके अलावा रास्ता क्या है। वे हठ करके तो पीएम की कुर्सी पर बैठे रह नहीं सकते। उन्हें पता है कि अगली बार वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं होंगे तो क्यों न पहले से ही माहौल बनाया जाए।
http://udbhavna.blogspot.com/

SAMEER said...

अजय जी, बिलकुल नब्ज पर हाथ रखा है आपने ...

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