Thursday, April 15, 2010

मोबाईल तो है , शौचालयों नहीं

संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की दूसरी बड़ी आबादी वाले देश भारत में करोड़ो लोगों के पास मोबाईल की सुविधा तो है लेकिन उससे बड़ी संख्या में लोग शौचालय जैसी मूल सुविधा से वंचित हैं. विश्वविद्यालय ने अपनी रिपोर्ट में कुछ सिफ़ारिशों भी की हैं

संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय ने कहा,ये एक विडंबना ही है कि भारत में, जहाँ लोगों के पास इतना पैसा है कि आधी आबादी के पास मोबाईल फ़ोन की सुविधा है, वहाँ आधे लोगों के पास शौचालयों की सुविधा मौजूद नहीं है.’ भारत की 45 प्रतिशत आबादी के पास करीब 55 करोड़ मोबाइल फ़ोन हैं.

लेकिन अगर हम वर्ष 2008 के आकड़ों को देखें तो पता चलेगा कि देश की मात्र 31 प्रतिशत आबादी के पास सुधरी हुई सफ़ाई व्यवस्था मौजूद है. इन सिफ़ारिशों को जारी करने का मक़सद है सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य में चिन्हित किए गए लक्ष्यों के अनुसार पानी और सफ़ाई व्यवस्था से वंचित लोगों की संख्या को आधा करना. विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ़ के अनुसार अगर ताज़ा आंकड़ों की दिशा और रफ़्तार यही रही तो करीब एक अरब लोगों को सफ़ाई व्यवस्था पहुँचाने के वर्ष 2015 तक के लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा पाएगा.

3 comments:

Udan Tashtari said...

धनतेरस और दीवाली की बधाई तो हटा लिजिये सर उपर से!!

मनोज कुमार said...

क्रूर सत्य!

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 17.04.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

Post a Comment