Thursday, October 15, 2009

धनतेरस

आज धनतेरस है, पूरे भारत में खरीदी का महापर्व, इसे धनवंतरी जयंती, यम दीपदान दिवस, धनत्रयोदशी भी कहते हैं। आज गोवत्‍स द्वादशी भी है। यह दिवाली महापर्व दिपावली त्‍यौहार महासंगम के हिस्‍से हैं।

कार्तिक कृष्ण त्रयोदषी को ही धनतेरस मनाते है। इस दिन नवीन पात्र खरीदने का बड़ा ही महत्व होता है। सोना, चांदी, प्‍लेटीनम इलेक्‍ट्रोनिक समान अन्‍य धातु, कार, स्‍कूटर, वाहन आदि की खूब खरीदी होती है।

स्मृतियों का कथन है कि धनतेरस के दिन टूटे फूटे बर्तन, टूटी खटियायों दोनों वस्तु लक्ष्मी की वृध्दि चाहने वाले को अपने घर मे नही रखना चाहिए इनके रखने से दरिद्र देव का स्थान प्राप्त होता है।

धनतेरस पूजा – धनतेरस पूजन विधि

सायंकाल को पितरों की प्रसन्न हेतु दीपदान दिया जाता है जिससे पितरों की संतुष्टि होती है। हिन्‍दू धर्म में पूर्वजों को हर समय याद करने का यह उत्‍तम उदाहरण है।

दीपदान के उपरातं स्नान कर शुध्‍द वस्त्र धारण करके चतुर्मुखी चांदी ताम्र अथवा स्वर्ण के दीप पात्र में शुध्‍द कपास की वर्तिका लेकर दीप प्रज्जवलित करें।

पुष्प अक्षत से दीपक का पूजन करके स्थिर धन के स्थान पर दीपक की स्थापना करें।

इस विधि से जो धन त्रयोदषी धनतेरस के दिन कुबेर का दीपदान करते है। उसके घर में लक्ष्मी स्थिर होकर विराजमान रहतीं है।

हैप्‍पी धनतेरस !
शुभ धनतेरस !
मंगलमय धनतेरस !

1 comment:

Pandit Kishore Ji said...

aapko deepawali ki shubhkaamnaaye agar ho sake to (depawali ka pujan hindi me)mere dwara likhit article awashya dekhiyega.........

Post a Comment

Blog Archive